पंचकूला, 18 अक्टूबर - राजकीय महाविद्यालय कालका की प्राचार्या प्रोमिला मलिक के कुशल नेतृत्व में वन्य जीवन सप्ताह के अंतर्गत गिद्धों के संरक्षण के लिए एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कालका महाविद्यालय के एसडीजी क्लब, प्राणी शास्त्र विभाग और जटायु कंजर्वेशन एंड ब्रीडिंग सेंटर के सौजन्य से विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए व्याख्यान का आयोजन किया गया। जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक प्रकाश मेहता ने विद्यार्थियों को गिद्धों के महत्व और उनकी घटती संख्या के बारे में बताया।
प्रकाश मेहता ने बताया कि गिद्धों की पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका और उनकी आबादी में अत्यधिक गिरावट के कारण संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता अनिवार्य हो गई है।त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए बी एन एच एस और हरियाणा वन और वन्य जीव विभाग में पहला संरक्षण अभियान शुरू किया था। इस पहल ने इन-सिट् और एकस-सिट् संरक्षण कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया और गिद्ध संरक्षण के एक प्रमुख घटक के रूप में जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र की स्थापना की।
उन्होंने कहा कि गिद्धों का उल्लेख भारतीय इतिहास में प्राचीन काल से मिलता है जो रामायण के युग तक जाता है। 1980 के दशक तक सफेद पीठ वाले गिद्ध को दुनिया का सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला शिकार पक्षी माना जाता था। 1980 के दशक के अंत तक भारत में लगभग चार करोड़ गिद्धों की आबादी थी। 1990 के दशक की शुरुआत से ही गिद्धों की आबादी में बाहरी गिरावट देखी गई खासकर सफेद पीठ वाले गिद्ध और अन्य प्रजातियों में भी कमी आई। इस गिरावट का मुख्य कारण मवेशियों में डाइक्लोफिनेक सोडियम और अन्य एन एस ए आई डी एस दवाओं का व्यापक उपयोग था।
प्रस्तुत कार्यक्रम एसडीजी क्लब की प्रभारी प्रोफेसर डॉक्टर नीरू सदस्या डॉ बिंदु रानी, विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर डॉ रामचंद के मार्गदर्शन और दिशा निर्देशन में किया गया। प्रस्तुत कार्यक्रम में डॉ अजीत, डॉक्टर गुरप्रीत, प्रोफेसर डॉक्टर बिंदु, डॉ सरिता और प्रोफेसर डॉ प्रदीप कुमार वैदिक रिसर्चर भी उपस्थित रहे।