चण्डीगढ़ः हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से बारहवीं तक पढ़ रहे अनुसूचित जातियों से संबंधित विद्यार्थियों को दी जाने वाली मासिक प्रोत्साहन राशि को बढ़ा दिया गया है। राज्य सरकार के इस निर्णय से अनुसूचित जातियों से संबंधित 11.79 लाख विद्यार्थी लाभांवित होेंगे और चालू वित्त वर्ष के दौरान इस कार्य पर 458.48 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।
हरियाणा की शिक्षा तथा अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग कल्याण मंत्री श्रीमती गीता भुक्कल ने आज यहां यह जानाकारी देते हुए बताया कि कक्षा ग्यारहवीं एवं बारहवीं में पढ़ रहे अनुसूचित जातियों के लड़कों को अब 300 रुपये की बजाए 400 रुपये प्रतिमास और लड़कियों को 400 रुपये की बजाए 600 रुपये प्रतिमास की छात्रवृत्ति दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, क क्षा नौंवी एवं दसवीं में पढ़ रहे अनुसूचित जातियों के लड़कों को अब 200 रुपये की बजाए 250 रुपये प्रतिमास और लड़कियों को 300 रुपये की बजाए 400 रुपये प्रतिमास की छात्रवृत्ति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कक्षा छठी से आठवीं में पढ़ रहे लड़कों को अब 150 रुपये की बजाए 200 रुपये प्रतिमास और लड़कियों को 200 रुपये की बजाए 300 रुपये प्रतिमास की छात्रवृत्ति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पहली से पांचवीं कक्षा तक के लड़कों अब 100 रुपये की बजाए 150 रुपये प्रतिमास और लड़कियों को 150 रुपये की बजाए 225 रुपये प्रतिमास की छात्रवृत्ति दी जाएगी।
श्रीमती भुक्कल ने कहा कि राज्य सरकार ने समाज के कमजोर वर्गों से संबंधित विद्यार्थियों में व्याप्त पढ़ाई को बीच में ही छोड़ने की प्रवृत्ति को रोकने तथा उनमें पढ़ाई के प्रति रूचि उत्पन्न करने के लिए वर्ष 2008-09 में मासिक छात्रवृत्ति योजना शुरू की थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गत वित्त वर्ष के दौरान अनुसूचित जातियों से संबंधित 10.72 लाख से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए मासिक छात्रवृत्ति उपलब्ध करवाने पर 301.85 करोड़ रुपये की राशि खर्च की।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में स्कूल प्रबन्धन कमेटियां गठित की गई हैं, जो सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं।
श्रीमती भुक्कल ने कहा कि प्रदेश में हाल ही में कक्षा पहली, छठी, नौंवीं और ग्यारहवीं में बच्चों को दाखिला देने तथा उन्हें स्कूलों में बनाए रखने के लिए सभी सरकारी स्कूलों में प्रवेश उत्सव कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छः से 18 वर्ष की आयु वर्ग के शत-प्रतिशत बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल करना है। राज्य में पहली बार सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे सभी बच्चों को शिशु सेतु कार्ड भी उपलब्ध करवाएं गए हैं, जोकि अभिभावकों के लिए अपने बच्चों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में सहायक है।