
डॉक्टर जयंत गांधी, जोश फाउंडेशन की ऑडियोलॉजिस्ट स्पीच थेरेपिस्ट देवंगी दलाल के साथ ऐटॉस और एक्टर डीनो मोरेया, मुकेश ऋषि, शिबानी कश्यप, एस रामाचंद्रन, डॉक्टर अनील कशी मुरारका और डॉक्टर फरहाद विजय अरोरा, ने मिल कर 100 हियरिंग इम्पैरेड बच्चों को प्रेरित किया।
मुंबई के संतोका हॉल में एटॉस के साथ जोश फाउंडेशन की पहल के तहत 100 से भी ज्यादा बच्चो को डिजिटल हियरिंग ऐड यंत्र दिए गए और साथ ही 600 छात्रों के लिए एक खेल शिक्षा कार्यक्रम का उद्घाटन भी किया गया।
ऑडियोलॉजिस्ट-स्पीच थेरेपिस्ट देवंगी दलाल, जोश फाउंडेशन के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयंती गांधी, और ऐटॉस के मुरली मेनन और गोहिल सुरेंद्रसिंह के अलावा, कार्यक्रम में 150 बच्चों और 50 शिक्षकों ने भाग लिया, और साथ में अभिनेता डीनो मोरिया और मुकेश ऋषि, गायक शिबानी कश्यप और पत्रकार-फिल्म निर्माता एस रामचंद्रन, फिल्म निर्माता डॉ. फराद विजय अरोड़ा, जनकल्याणकारी डॉ. अनील काशी मुरारका ने बच्चों को प्रेरित किया और साथ में उनका मनोरंजन भी किया।
हियरिंग ईमपैरेड बच्चो (सुनने में असमर्थ बच्चों) ने गाने गाए, और साथ में म्यूजिक पर डांस किया, और इस बात का अहसास तक नहीं होने दिया की उन्हें कम सुनाई या बिलकुल सुनाई नहीं देता. बच्चो का डांस देखने लायक था.
जोश फाउंडेशन एक एनजीओ हैं, जो हियरिंग इम्पैरेड बच्चों को सशक्त बनाने का काम करती हैं, इसे ईएनटी विशेषज्ञ डॉ जयंत गांधी और ऑडियोलॉजिस्ट – स्पीच चिकित्सक देवंगी दलाल द्वारा स्थापित किया गया था.
देवंगी दलाल ने लोगों से अनुरोध किया कि वे बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए फाउंडेशन का हिस्सा बने ताकि इन बच्चो को एक 'सामान्य' जीवन जीने की प्रेरणा मिले.
उन्होंने कहा, "दुनिया में सबसे अच्छी और सबसे खूबसूरत चीज़ों को देखा या छुआ नहीं जा सकता है, उन्हें केवल महसूस किया जा सकता है।"
"हम, जोश फाउंडेशन में, समाज को वापस देने में विश्वास करते हैं जो हमें प्राप्त हुआ है। डॉ. जयंत गांधी और मैंने दोनों डिजिटल श्रवण सहायता वाले बच्चों को लाभान्वित करने के लिए काम किया है। प्रत्येक डिवाइस न सिर्फ बच्चे बल्कि परिवार के जीवन को भी बदलता है। हमें खुशी है कि एटीओएस इस पहल में हमारी मदद कर रहा है। खेल पहल बच्चे के आत्म-विकास में मदद करती है, साथ में आत्मविश्वास और टीम बिल्डिंग क्वालिटी भी आती हैं” दलाल ने कहा!
मुकेश ऋषि ने कहा, "विदेशों में बच्चा की पैदाइश के 6-8 महीने के भीतर उसके हियरिंग परीक्षण किये जाते हैं, ताकि यदि कोई प्रॉब्लम हो तो उसका पता लगाया जा सके और सुधार किया जा सके। उपचार आसानी से किया जा सकता है और बच्चे को जीवन भर के लिए राहत मिल सकती है। मैं अपनी सरकार से उसी दिशा में काम करने का आग्रह करता हूं ताकि हमारे बच्चे का कल बेहतर हो सकें। "
"एक बधिर बच्चे को आम तौर पर गूंगा भी कहा जाता है। लेकिन बच्चे को वास्तव में एक डिजिटल श्रवण सहायता की आवश्यकता है, जैसे मैंने आज जोश और एटीओएस की पहल में देखा। बच्चा समाज की संपत्ति बन जाता है और आसमान छू सकता हैं, हमें बस इनकी मदद करनी हैं” ऐसा डीनो मोरिया ने कहा!
"जिन बच्चो को बधिर और गूंगा कहा जाता है, अब उन्हें इस तरह से लेबल नहीं दिए जायेगे, क्योंकि अब उनके पास डिजिटल हियरिंग ऐड हैं, अब वे सुन सकते हैं, बोल सकते हैं, गा सकते हैं और नाच सकते हैं, जैसे की हम लोग करते हैं! जोश फाउंडेशन और एटीओएस ने बधिरों और गूंगा से जुडी धारणा को तोडा हैं, उन्हें सशक्त बनाया है" ऐसा शिबानी कश्यप ने व्यक्त किया।
पत्रकार-फिल्म निर्माता एस रामचंद्रन, फिल्म निर्माता डॉ फराद विजय अरोड़ा, डॉ. अनील काशी मुरारका और अन्य मेहमानों ने जोश फाउंडेशन-एटीओएस की पहल को बहुत सराहना दी!