नई दिल्ली - राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आया है। इसके हत्यारों को राहत न पहुंचाते हुए पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा है कि हत्यारों की रिहाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा है कि सजा माफी का अधिकार राज्यों को नहीं है। वहीं, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि केन्द्र को ही सज़ा माफी का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि उम्रकैद का मतलब ताउम्र जेल में रहना ही होता है।
राजीव गांधी मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला 258 पेज का है। संवैधानिक पीठ ने कहा है अगर फांसी को उम्र कैद में तब्दील करने के वक्त अगर कोर्ट ये शर्त कोर्ट लगा देता है कि इसकी रिहाई नहीं हो सकती तो रिहाई नहीं होगी। दरअसल राजीव गांधी हत्याकांड में मौत की सजा से राहत पाने वाले सभी दोषियों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। राज्य सरकार ने सभी दोषियों संथन, मुरुगन, पेरारीवलन और उम्रकैद की सजा काट रहे नलिनी श्रीहरन, रॉबर्ट पायस, रविचंद्रन और जयकुमार को रिहा करने का आदेश दिया था।