नई दिल्ली - भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने क्रिकेट में उम्र को लेकर धोखाधड़ी की बढ़ती प्रवृति को फिक्सिंग और भ्रष्टाचार के समान बताते हुये इसे रोकने के प्रयासों पर बल दिया है। द्रविड़ ने पूर्व भारतीय कप्तान मंसूर अली खान पटौदी मेमोरियल लेक्चर में मंगलवार रात यहां कहा कि जूनियर क्रिकेट में उम्र की धोखाधड़ी इस खेल के लिये विनाशकारी साबित हो सकती है और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और राज्य क्रिकेट संघों को मिलकर इसे रोकने के उपाय करने चाहिये।
बीसीसीआई ने गलत उम्र बताने पर पिछले अक्टूबर में 22 खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया था। पूर्व कप्तान ने खिलाड़ियो के लिये जन्म प्रमाण पत्र क्रिकेट अकादमियों में जमा करने को अनिवार्य करने पर बल देते हुये कहा कि मेरा मानना है कि उम्र की धोखाधड़ी का यह कारोबार खतरनाक है और इससे मेरे मन में यही सवाल पैदा होता है कि यदि बच्चा अपने परिजनों और कोचों को इस तरह झूठ बोलते देखेगा तो क्या वह भी धोखा करना नहीं सीखेगा।
पटौदी व्याख्यान के दौरान पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर, बिशन सिंह बेदी, अजीत वाडेकर, मोहम्मद अजहरूद्दीन और अनिल कुंबले के अलावा भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीमें भी मौजूद थीं। भारत की अंडर 19 टीम के कोच द्रविड़ ने कहा 14 वर्ष की उम्र में यह मात्र उम्र से जुड़ा मामला हो सकता है लेकिन 25 वर्ष की उम्र में यह फिक्सिंग और भ्रष्टाचार से जुड़ सकता है।
दोनों ही मामले धोखाधड़ी से जुड़े हैं जिनमें कोई अंतर नहीं है। करीब आधे घंटे तक चले इस व्याख्यान में द्रविड़ ने कहा कि युवा खिलाड़यिों के परिजन और कोच इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़यिों की उम्र को लेकर धोखाधड़ी यह जानते हुये की जाती है कि पकड़े जाने की स्थिति में उनका करियर खराब हो सकता है। इसके अलावा ऐसे लोगों की वजह से वे खिलाड़ी बाहर रह जाते हैं जो पूरी तरह इसके हकदार होते हैं।