नई दिल्ली 20 मार्च: कांग्रेस और भाजपा पर फॉरेन कांट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) का उल्लंघन करने के आरोप पर केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। केंद्र ने कहा है कि दोनों राजनीतिक दलों को दान देने वाली कंपनियां विदेशी नहीं हैं। इसलिए एफसीआरए उल्लंघन का मामला नहीं बनता। वहीं, कांग्रेस और भाजपा ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा। जस्टिस एसके कौल और जस्टिस इंद्रमीत कौर की खंडपीठ ने दोनों दलों को जवाब तैयार करने के लिए लगभग चार महीने का समय दिया। अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी। केस की सुनवाई एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म और भारत सरकार के पूर्व सचिव ईएएस शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर चल रही है।
उनकी तरफ से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट में भाजपा और कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि दोनों दल पार्टी के लिए चंदा जमा करने के लिए एफसीआरए का उल्लंघन कर रहे हैं। इसलिए दोनों पार्टियों को मिलने वाली आयकर छूट रद्द होनी चाहिए। आरोप लगाया कि दोनों दलों ने इंग्लैंड स्थित वेदांता ग्रुप की कंपनी वेदांता रिसोर्स से मोटा विदेशी फंड लिया। इसका खुलासा कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट से हुआ है। दलील दी कि एफसीआरए के तहत राजनीतिक गतिविधियों के लिए विदेशी कंपनियों से वित्तीय मदद नहीं ली जा सकती। इस पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए भाजपा और कांग्रेस के अलावा केंद्र सरकार को भी जवाब-तलब कर लिया। अब, केंद्र ने जवाब दिया है कि उन्होंने मामले की जांच की है, जिससे पता चलता है कि वेदांता रिसोर्स नामक जिस कंपनी से राजनीतिक दलों को दान दिया गया, उस कंपनी का 51 फीसद मालिकाना हक भारतीय नागरिक अनिल अग्रवाल के पास है। इसलिए उसे विदेशी कंपनी नहीं कह सकते।