चेन्नई - खराब दौर से गुजर रही भारतीय क्रिकेट टीम राजकोट में हारने के बाद अब और दबाव में आ चुकी है और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गुरुवार को चेन्नई में खेले जाने वाले चौथे वनडे में यदि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के धुरंधर फिर नाकाम रहते हैं तो ट्वेंटी-20 की तरह वनडे सीरीज भी हाथ से निकल जाएगी। भारत पांच मैचों की सीरीज में 1-2 से पिछड़ चुका है और चेन्नई वनडे उसके लिए करो या मरो का मुकाबला है, क्योंकि इसमें मिली शिकस्त से मेहमान सीरीज में अपराजेय बढ़त बना लेगा।
घरेलू मैदान पर कभी अच्छा रिकार्ड रखने वाली भारतीय टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभागों में संतोषजनक प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। अपने निजी प्रदर्शन और कप्तानी को लेकर आलोचनाएं झेल रहे धोनी ने इंदौर वनडे में अकेले दम पर टीम को जीत दिलाई तो राजकोट में भी 47 रन की दूसरी बड़ी पारी खेली, लेकिन बाकी खिलाडिय़ों से उन्हें इस बार फिर कोई सहयोग नहीं मिला, जिससे भारत सीरीज में पिछड़ गया। लगातार अच्छी फार्म में चल रहे रोहित शर्मा जरूर धोनी का साथ निभा रहे हैं।
वनडे सीरीज के पिछले तीन मैचों में कुल 218 रन बनाकर रोहित फिलहाल सर्वाधिक रन स्कोरर हैं, जिसमें एक शतक और एक अर्द्धशतक भी शामिल है। वह सीरीज के पिछले तीनों मैचों में भारतीय टीम के एकमात्र शतकधारी हैं, जबकि रन के मामले में धोनी 170 रन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। इसमें धोनी की नाबाद 92 रन की मैच विजयी पारी अहम है। इसके अलावा अजिंक्या रहाणे तीसरे सर्वश्रेष्ठ स्कोरर हैं। उधर, टीम इंडिया की एक और बड़ी समस्या जो सामने उबरकर सामने आई है, वह है लक्ष्य का पीछा करने में नाकाम रहना।
भारत पहले कानुपर वनडे में दक्षिण अफ्रीका के 303 और राजकोट में 270 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए हार, जबकि इंदौर में उसने अपने 247 रन के स्कोर का बचाव किया और जीत दर्ज की। साफ है कि जब भारत को लक्ष्य का पीछा करना पड़ता है तो वह सफल नहीं हो पाता है। इसके अलावा टीम के सही संयोजन को लेकर भी टीम के बड़े रणनीतिकार माने जाने वाले कप्तान धोनी कशमकश में हैं।