नई दिल्ली - भारत के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग की गुपचुप संन्यास की घोषणा प्रत्येक क्रिकेठ प्रेमी को अखर रही है। क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि सहवाग इससे कहीं बेहतर विदाई के हकदार थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक सहवाग मैदान से खेल को अलविदा कहना चाहते थे। सहवाग ने इसके लिए बीसीसीआई से अनुरोध भी किया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार सहवाग विदाई मैच चाहते थे, लेकिन बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने भी एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि उन्हें सहवाग के कैरियर पर गर्व है, लेकिन बस एक बात का मलाल है कि उन्हें मैदान से विदाई नहीं मिली। कुंबले, तेंदुलकर, गांगुली को संन्यास से पहले फेयरवेल मैच का मौका दिया गया था। सहवाग भी इसी अंदाज में संन्यास लेना चाहते थे, लेकिन बीसीसीआई ने उनकी यह आखिरी इच्छा पूरी नहीं की।
मैदान से यादगार विदाई लेना किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है और शायद इसी वजह से सहवाग ने यह कथित अनुरोध किया हो। सहवाग ने उनके टेस्ट करियर को उड़ान देने के लिए पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का शुक्रिया अदा किया। सहवाग ने कहा कि सौरव ने उनके खातिर अपने ओपनिंग स्पॉट तक को कुर्बान कर दिया था। वह जब तक क्रिकेट से जुड़े रहेंगे, सौरव को याद रखेंगे। सहवाग ने कहा कि टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने ही उनमें टेस्ट क्रिकेट की संभावना देखी थी।
मैंने टेस्ट क्रिकेट में जो ट्रिप्पल सेंचुरी बनाई, उसका श्रेय सौरव को ही जाता है। सहवाग ने सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर और कपिल देव को अपना रोल मॉडल बताया। सहवाग ने कहा कि उन्होंने बड़े होते हुए इन महान बल्लेबाजों को खेलते देखा। सहवाग ने बताया कि सचिन ने उन्हें एक बार बताया था कि 90 के बाद कैसे बैटिंग की जाती है। सहवाग को भी एक बोलर से डर लगता था। सहवाग ने इसका खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें श्रीलंकाई स्पिनर मुरलीधरन का सामना करते हुए डर लगता था।