नई दिल्ली - औद्योगिक गतिविधियों में तेजी की बदौलत सितंबर में देश में ईंधन की मांग पिछले एक दशक से अधिक समय की सबसे तेज 15.1 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के आंकड़ों के अनुसार सितंबर में ईंधन की मांग पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 15.1 प्रतिशत बढ़ी है, जो अगस्त 2005 के बाद से सबसे तेज गति से बढ़ी मांग है। डीजल और पेट्रोल की बिक्री में तेजी आने की बदौलत सितंबर में कुल 1.47 करोड़ टन ईंधन बेचा गया।
इस दौरान देश में इस्तेमाल होने वाली रिफाइंड ईंधन में 40 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले डीजल की मांग 20.1 फीसदी की बढ़त लेकर 58.9 लाख टन पर पहुंच गई, जो अगस्त 2005 के बाद की सबसे तेज गति से बढ़ी मांग है। पीपीएसी ने कहा कि मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने के कारण देश के सिंचाई साधनों के अभाव वाले इलाके में सिंचाई के लिए मोटर पंप का इस्तेमाल बढऩे से सितंबर में डीजल की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान पेट्रोल की मांग मई 2013 के बाद की सबसे तेज 25.4 फीसदी की रफ्तार से बढक़र 19 लाख टन पर पहुंच गई। इसी तरह सितंबर में रसोई गैस की बिक्री 4.1 फीसदी बढक़र 16 लाख टन और नेप्था की बिक्री 38.4 फीसदी की बढ़त लेकर 12 लाख टन पर पहुंच गई।