वाशिंगटन - प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल को विस्कांसिन विश्वविद्यालय की एक टीम द्वारा विकसित और पेटेंट की हुई प्रौद्योगिकी का बिना अनुमति उपयोग करने पर 86.24 करो़ड रूपये हर्जाना देना प़ड सकता है। प्रौद्योगिकी का विकास करने वाली टीम में दो भारतीय मूल के अमेरिकी भी हैं। गुरिंदर सोही और तेरानी विजयकुमार दोनों बि़डला इंस्टीटयूट ऑफ टेकनोलॉजी एंड साइंस (बिट्स)-पिलानी के इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग स्त्रातक हैं।
दोनों प्रौद्योगिकी का विकास करने वाले चार सदस्यीय दल का हिस्सा थे। विस्कांसिन की अदालत ने मंगलवार को पाया कि आईफोन और आईपैड जैसे कई लोकप्रिय उपकरणों का प्रोसेसर बनाने में एप्पल ने यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कांसिन एलुमनी रिसर्च फाउंडेशन (डब्ल्यूएआरएफ) की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया है। कोर्ट न्यूज सर्विस के मुताबिक, अदालत को अब यह तय करना है कि एप्पल को फाउंडेशन को कितनी राशि का भुगतान करना है। करीब डेढ़ साल पहले डब्ल्यूएआरएफ ने वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ विस्कांसिन की जिला अदालत में एप्पल के खिलाफ मुकदमा दाखिल किया