नई दिल्ली - कमजोर मानसून के कारण उत्पादन घटने और त्योहारी सीजन में मांग बढऩे से दालों की कीमत में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम ने शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने से देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में दलहनों की कुल पैदावार 1.7 करोड़ टन रह सकती है, जबकि इसकी मांग 2.7 करोड़ टन की है। इससे सरकार को एक करोड़ टन दाल का आयात करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार दिवाली से क्रिसमस तक दालों की मांग में तेजी रहने से दाल की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। मांग पैटर्न के अनुसार अलग-अलग दालों की कीमतें 90 रुपए से 150 रुपए प्रति किलोग्राम तक है। रिपोर्ट के मुताबिक दालों की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार को एक करोड़ टन दाल का आयात करना होगा। हालांकि दूसरे उत्पादक देश भी आपूर्ति घटने जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दालों का आयात भी महंगा होने का अनुमान है। एसोचैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सबसे अधिक चने और अरहर की खेती होती है।
चना और अरहर का उत्पादन क्रमश: 70 लाख टन और 27 लाख टन होता है और कुल दलहन उत्पादन में इनका योगदान क्रमश: 41 प्रतिशत और 16 प्रतिशत है। इनके अलावा मूंग और उड़द प्रमुख हैं। रिपोर्ट के अनुसार दलहन के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश है तथा खरीफ सीजन में देश के कुल दलहन उत्पादन में इनका संयुक्त योगदान 70 प्रतिशत है, लेकिन औसत से कम बारिश होने के कारण इन राज्यों में दलहन पैदावर प्रभावित होने की आशंका है, जिससे दालों की कीमतें और बढ़ सकती है। एसोचैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि दलहन उत्पादन में सबसे अधिक 24.9 प्रतिशत योगदान महाराष्ट्र का है। इसके बाद कर्नाटक का 13.5 प्रतिशत, राजस्थान का 13.2 प्रतिशत, मध्य प्रदेश का 10 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश का आठ प्रतिशत है।