दुबई - अमरीका में ब्याज दर में फिलहाल बढ़ोतरी नहीं करने के निर्णय से प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डालर में आई बड़ी गिरावट के कारण बीते सप्ताह कच्चा तेल के दाम पांच प्रतिशत तक लुढक़ गए। आलोच्य सप्ताह में ब्रेंट क्रूड 1.61 डालर प्रति बैरल यानि 3.3 प्रतिशत लुढक़कर 47.47 डालर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि आलोच्य अवधि में अमरीकी क्रूड 2.22 डालर प्रति बैरल यानी 4.8 प्रतिशत गिरकर 44.68 डालर प्रति बैरल पर बोला गया। विश्लेषकों के अनुसार, अमरीका में फेडरल रिजर्व द्वारा वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितता के मद्देनजर ब्याज दर नहीं बढ़ाने के निर्णय से डालर में भारी गिरावट दर्ज की गई जिसके कारण कच्चा तेल की कीमतें धराशायी हो गईं।
उन्होंने कहा कि प्रमुख तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक द्वारा तेल बाजार में अपनी भागीदारी सुरक्षित रखने के लिए कच्चा तेल का उत्पादन नहीं घटाने के निर्णय से इस पर दबाव बढ़ा है। ईरान का पश्चिमी शक्तियों के साथ परमाणु समझौता संपन्न हो जाने के बाद उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध भी हटा लिए गए हैं। उसने पहले ही कहा है कि अपनी पुरानी बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए वह बिना कीमतों की चिंता किये निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसने भी कच्चा तेल पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
हालांकि, अमरीका में कच्चे तेल का उत्पादन कर रहे कुओं की संख्या में लगातार तीसरे सप्ताह आयी गिरावट से ने इसे और ज्यादा लुढक़ने से बचाए रखा। विश्लेषकों ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार आ रही गिरावट के कारण कच्चा तेल की कीमतों में सुधार काफी धीमा होगा। ओपेक सूत्रों ने भी कहा कि उन्हें कच्चा तेल की कीमत में प्रति वर्ष पांच डालर प्रति बैरल की बढ़ोतरी की उम्मीद है और यह 2020 तक 80 डालर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच सकेगा।