नई दिल्ली - अगले 15 साल में देश में कारों की बिक्री बढक़र 90 लाख पर पहुंच जाएगी और चीन तथा अमरीका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार होगा। वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम ने बाजार अध्ययन एजेंसी पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि इस समय दुनिया भर में हर साल छह करोड़ 80 लाख कारें बिकती हैं, जिसमें 29 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ चीन सबसे बड़ा बाजार है। कुल मांग का 24 प्रतिशत यूरोपीय देशों, 11 प्रतिशत अमरीका, सात प्रतिशत जापान तथा चार प्रतिशत (26 लाख) भारत से आती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 तक दुनिया में कारों की बिक्री बढक़र आठ करोड़ 60 लाख तथा वर्ष 2030 तक 15 करोड़ पर पहुंच जाएगी।
वहीं, भारत में 2020 तक बिक्री बढक़र 43 लाख तथा 2030 तक 90 लाख हो जाएगी और कुल वैश्विक बिक्री में उसकी हिस्सेदारी छह प्रतिशत होगी जो चीन तथा अमरीका के बाद सबसे ज्यादा होगी। उस समय चीन की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत तथा अमरीका की नौ प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, विकसित और विकासशील देशों में बिक्री का अनुपात भी 15 साल बाद तक पूरी तरह पलट जायेगा। अभी जहां कुल बिक्री में अमेरिका और यूरोपीय देशों की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत है, वहीं 2030 में भारत, चीन और ब्राजील में दुनिया की 50 फीसदी कारें बिकेंगी, जबकि अमरीकी और यूरोपीय बाजारों की हिस्सेदारी मात्र 23 फीसदी पर सिमट जाएगी। पीडब्ल्यूसी के अनुसार, विकसित देशों में नई मांग के लिए गुंजाइश नहीं होगी, क्योंकि वहां पहले से ही लगभग सबके पास कार होगी और सिर्फ कार बदलने वाले ग्राहकों से ही मांग आएगी।
वहीं, उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में पहली बार कार खरीदने वालों की मांग से बिक्री बढ़ेगी। साथ ही जनसंख्या के साथ आमदनी बढऩे से भी इन देशों में बिक्री को बल मिलेगा। भारतीय बाजार के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां तकनीक आधारित एप्लीकेशनों वाले वाहनों की मांग ज्यादा होगी। अभी भले ही लोगों की जानकारी और जरूरत कम हो, लेकिन दुनिया के बारे में जानकारी रखने वाली तथा आकांक्षा से परिपूर्ण युवा आबादी के कारण मांग में तेजी आने की उम्मीद है।