नई दिल्ली - कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) कर्मचारी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (ईडीएलआई) के तहत अधिकतम इंश्योरेंस कवर बढ़ाकर 5.5 लाख रुपए कर सकता है। फिलहाल, यह 3.6 लाख रुपए है। ईपीएफओ के छह लाख से अधिक अंशधारकों के लिए बीमा लाभ बढ़ाने के प्रस्ताव को पेंशन एवं ईडीएलआई क्रियान्वयन समिति की नौ सितंबर को होने वाली बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। बैठक के एजेंडे में यह मामला शामिल है। मंजूरी के बाद इसे केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सामने रखा जाएगा। इस निकाय के अध्यक्ष श्रम मंत्री हैं। अंत में संशोधित ईडीएलआई योजना को श्रम मंत्रालय की अधिसूचना के जरिए लागू किया जाएगा।
फिलहाल ईडीएलआई के तहत अगर किसी ईपीएफओ अंशधारक की एक ही संगठन में लगातार एक साल सेवा के बाद मृत्यु हो जाती है तो उसके द्वारा नामित व्यक्ति को पिछले 12 महीने के लिए के उसके औसत मासिक वेतन की 20 गुना राशि 20 प्रतिशत बोनस के साथ दी जाएगी। इस लिहाज से इस समय इस योजना के लिए 15000 प्रति महीना की अधिकत वेतन सीमा स्थिति में अधिकतम बीमा राशि 3.6 लाख रुपए बनती है। यह प्रस्ताव किया गया है कि इस योजना में पिछले 12 महीने के औसत मासिक वेतन का 30 गुना बीमा किया जाना चाहिए। इसके साथ-साथ ईपीएफ खाते में औसत शेष राशि के 50 प्रतिशत या अधिकतम एक लाख रुपए भी देय होगा। ऐसे में अधिकतम बीमा राशि बढक़र 5.5 लाख रुपए हो जाएगी।
प्रस्ताव में 12 महीने से कम और कम से कम 12 महीने पूरा करने वाले अंशधारकों के मामले में बीमा राशि के आकलन के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने की व्यवस्था भी खत्म करने का प्रस्ताव है। मौजूदा योजना के तहत अगर अंशधारक की सेवा 12 महीने से कम है तो वह अधिकतम 1.2 लाख बीमा राशि पाने का हकदार है। इस श्रेणी के अंशधारक अपने पीएफ अकाउंट में औसत राशि (50 हजार रुपए से कम की शर्त पर) के बराबर बीमा राशि के हकदार हैं। अगर उनके पीएफ अकाउंट में जमा रकम 50000 रुपए से ज्यादा है तो वे उतनी ही राशि के बीमा के हकदार होंगे और इसके अलावा 50000 रुपए से अधिक राशि का 40 प्रतिशत भी उन्हें मिलेगा।
लेकिन, इसके लिए अधिकतम सीमा एक लाख रुपए है। वे दी जाने वाली राशि का 20 प्रतिशत बोनस के भी हकदार हैं। सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, ईपीएफओ के पास 31 मार्च तक 15722.99 करोड़ रुपए का फंड था। पिछले वित्तीय वर्ष में इसके इंश्योरेंस फंड में डिपॉजिट राशि में 936.12 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। ईडीएलआई स्कीम के तहत वर्करों के मूल वेतन का 0.5 फीसदी हर महीने इंश्योरेंस प्रीमियम के रूप में जा रहा है।