शिमला - हिमाचल प्रदेश की जनता बुधवार को परेशानी झेलने को तैयार रहे। बुधवार को न तो सरकारी बसें चलेंगी, न ही प्राइवेट। इसके साथ ही टैक्सी व अन्य यातायात के साधन भी उपलब्ध नहीं होंगे। सडक़ परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक- 2015 के खिलाफ एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति सहित ऑल हिमाचल कामर्शियल व्हीकल आपरेटर एकजुट हो गए हैं। समन्वय समिति सहित कामर्शियल व्हीकल आपरेटरों के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि बुधवार को एक भी वाहन सडक़ पर नहीं चलेगा। यह फैसला कर्मचारी वर्गों, स्कूली बच्चों सहित आम जनता को भारी दिक्कतों में डालेगा।
एचआरटीसी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति व कामर्शियल व्हीकल आपरेटर यूनियन का आरोप है कि प्रारूप विधेयक को भारत सरकार की ओर से देश में प्रसारित किया गया है। सडक़ परिवहन मंत्री ने अधिकृत रूप में कहा है कि प्रारूप विधेयक शीघ्र ही संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। इनका आरोप है कि केंद्र सरकार सार्वजनिक परिवहन का बाजारीकरण कर इसे बड़े उद्योगपतियों को बेचने जा रही है। यह विधेयक जल्दबाजी में तैयार किया गया है। वाहन चालकों को दुर्घटना के समय कड़ी सजा प्रावधान किया गया है, जो घातक है। इस विधेयक का प्रभाव न सिर्फ परिवहन उद्योग से जुड़े कर्मचारियों पर पड़ेगा, बल्कि आम जनता पर भी होगा। संयुक्त समन्वय समिति व कामर्शियल व्हीकल आपरेटर यूनियन ने उक्त विधेयक का पूर्ण विरोध किया है।
परिवहन कर्मचारियों ने मंगलवार को जेसीसी के बैनर तले प्रदेश में कई जगहों पर गेट मीटिंग कर प्रदर्शन किया। शिमला में ओल्ड बस स्टेंड पर गेट मीटिंग कर प्रदर्शन किया गया और बुधवार को प्रस्तावित हड़ताल को पूर्ण रूप से सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई।