बीजिंग - विश्व एथलेटिक्स में जमैका के उसेन बोल्ट की बादशाहत को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। अमेरिका के जस्टिन गाटलिन और टायसन गे ने इस साल बोल्ट को खुली चुनौती दी लेकिन बोल्ट ने रविवार को बीजिंग में जारी विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 100 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण जीतकर खुद को एक बार फिर श्रेष्ठ साबित किया। 2008 के बीजिंग ओलम्पिक के दौरान ऎतिहासिक बर्ड्स नेस्ट स्टेडियम में इस स्पर्धा का स्वर्ण हासिल करने वाले बोल्ट ने 9.79 सेकेंड में रेस पूरी की। गाटलिन ने 9.80 सेकेंड के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। अमेरिका के ही ट्रेवोन ब्रॉमवेल और कनाडा के आंद्रे ग्रेसी 9.92 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
दोनों ने कांस्य पदक साझा किया। एथेंस ओलम्पिक में पहला और लंदन ओलम्पिक में तीसरा स्थान हासिल करने वाले गाटलिन 2005 हेलसिंकी विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं। इस साल गाटलिन ने साल का सबसे अच्छा समय निकाला था और डोपिंग प्रतिबंध से लौटने के बाद जीवन के श्रेष्ठ फार्म मे दिख रहे थे। इसी तरह 2007 के ओसाका विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाले गे और जमैका के ओसाफा पावेल भी बोल्ट को चुनौती देते नजर आ रहे थे। ऎसे में बोल्ट के लिए बीजिंग में अपने खिताब की रक्षा करना जरूरी हो गया था क्योंकि यह उनकी प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका था। तीन दिग्गजों की मौजूदगी में हासिल बोल्ट की इस जीत को अब तक सबसे बडी जीत मानी जा रही है।