नई दिल्ली - टीम इंडिया के सबसे अनुभवी स्पिनर हरभजन सिंह के लिए गाले में निराशाजनक प्रदर्शन और भारत की हार के बाद खतरे की घंटी बज गई है। भारत यदि पहला टेस्ट जीत जाता तो हरभजन को लेकर किसी तरह की कोई बात नहीं होती और स्टुअर्ट बिन्नी को 16वें खिलाड़ी के रूप में टीम इंडिया से जोडऩे की नौबत नहीं आती। पी सारा ओवल की पिच श्रीलंका में तेज गेंदबाजों के लिए सबसे ज्यादा मददगार पिच मानी जाती है। ऐसे में यदि कप्तान विराट कोहली तीन तेज गेंदबाजों और दो स्पिनरों के साथ उतरने का फैसला करते हैं तो हरभजन को बाहर होना पड़ सकता है।
वापसी करने के बाद हरभजन का यह दूसरा टेस्ट था लेकिन गाले की स्पिन की मददगार पिच पर हरभजन सिर्फ एक विकेट ही ले पाए। बीसीसीआई के दूसरे टेस्ट के लिए बिन्नी को टीम के साथ 16वें खिलाड़ी के तौर पर जोड़े जाने से अटकलें तेज हो गई हैं कि उन्हें आलराउंडर की जगह मिल सकती है और ऐसे में हरभजन को अंतिम एकादश से बाहर होना पड़ सकता है। हरभजन यदि अब अंतिम एकादश से बाहर होते हैं और टीम दूसरे टेस्ट में वापसी कर जाती है तो फिर भज्जी के लिए एकादश में वापसी बहुत मुश्किल हो जाएगी।
तो वहीं श्रीलंका के खिलाफ 20 अगस्त से पीसारा ओवल में शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट में 16वें खिलाड़ी के तौर पर शामिल किए गए आलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी 30 वर्ष बाद अपने पिता रोजर्स बिन्नी का इतिहास दोहराएंगे, जिन्हें बिलकुल ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा था। वर्ष 1985 में विश्वकप विजेता टीम के सदस्य रहे रोजर बिन्नी को उस समय श्रीलंका के दौरे पर गई भारतीय टीम में पहले टेस्ट के बाद बतौर अतिरिक्त खिलाड़ी शामिल किया गया था। आलराउंडर रोजर बिन्नी ने कैंडी में हुए दूसरे टेस्ट में शिरकत की थी।