शंघाई - अर्थव्यवस्था की गिरती विकास दर और मुद्रा अवस्फिति का दबाव झेल रहे चीन के कमजोर आर्थिक आंकड़े आने के बाद मंगलवार को अपनी मुद्रा यूआन का अवमूल्यन करने से बीएसई का सेंसेक्स करीब 236 अंक और डालर के मुकाबले रुपया 34 पैसे लुढक़ गया। चीन के केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसने यूआन का लगभग दो प्रतिशत अवमूल्यन किया है। इससे दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्रओं के मुकाबले डालर की तेजी ने शेयर बाजार पर भारी दबाव बनाया और सेंसेक्स 235.63 अंक टूटकर 28 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 27866.09 अंक पर और रुपया 34 पैसे की गिरावट लेकर लगभग दो महीने के न्यूनतम स्तर 64.21 रुपए प्रति डॉलर पर आ गया।
चीन के केंद्रीय बैंक का कहना है कि यूआन के अवमूल्यन के बाद डालर के मुकाबले इसकी नयी विनिमय दर बाजार के कारकों का ज्यादा संतुलित चित्र दिखाती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उसने निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए यह कदम उठाया है। अवमूल्यन के बाद यूआन लगभग तीन साल के निचले स्तर पर आ गया। जुलाई में चीन का निर्यात 8.3 प्रतिशत गिर गया। इसका मुख्य कारण उसके तीन सबसे बड़े व्यापारिक सहयोगी यूरोप, अमरीका और जापान से मांग में कमी आना रहा है। इन देशों में आर्थिक सुस्ती से मांग में कमी आई है। पिछले साल से ही आर्थिक दबाव में चल रहे चीन ने 2015 के लिए अपनी अनुमानित विकास दर घटाकर सात प्रतिशत कर दी है।
कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करना भी उसके लिए मुश्किल होगा। यदि चीन सात प्रतिशत की विकास दर हासिल कर भी लेता है जो यह पिछले 25 साल की उसकी सबसे धीमी वृद्धि होगी। उल्लेखनीय है कि चीन का केंद्रीय बैंक पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने मंगलवार को औसत विनिमय दर 6.2298 यूआन प्रति डालर तय की जो सोमवार को 6.1162 यूआन प्रति डालर रखा गया था। साथ ही उसने औसत विनिमय दर की गणना का तरीका भी बदल दिया है, जिससे अब यह बाजार के कारकों पर ज्यादा निर्भर करेगा तथा आने वाले समय में बाजार के अनुरूप यूआन में और गिरावट देखी जा सकती है।