गाले - लगभग तीन दशकों तक गृहयुद्ध की भयावहता झेल चुके श्रीलंका को क्रिकेट में नए मुकाम तक पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कप्तान कुमार संगाक्कारा अपनी अंतिम सीरीज से पहले करियर के पलों को याद करते हुए भावुक हो गये और लाहौर में टीम पर हुए आतंकवादी हमले को जिंदगी का सबसे खौफनाक पल बताया। विश्वकप के बाद वनडे क्रिकेट को अलविदा कह चुके संगाक्कारा बुधवार से भारत के खिलाफ शुरू हो रही टेस्ट सीरीज के दौरान ही टेस्ट प्रारूप से भी संन्यास ले लेंगे। अपने करियर में संभवत: आखिरी बार संवाददाताओं को संबोधित करते हुए संगाक्कारा ने कहा कि मार्च 2009 में श्रीलंकाई टीम पर लाहौर में हुआ हमला मेरे जीवन की सबसे खैफनाक घटनाओं में से है और मैं इसे कभी नहीं भूल सकता हूं।
15 वर्षों के लाजवाब करियर के बाद खेल से संन्यास लेने जा रहे संगाक्कारा ने कहा कि तिलन समरवीरा उस हमले में घायल हो गए थे और फिर अपने अगले ही मैच में उन्होंने शतक जड़ा था जो कि सच में अतुलनीय है। पाकिस्तान के लोगों ने हमेशा ही हमारा स्वागत किया है, लेकिन वहां खेलने या नहीं खेलने का फैसला खिलाड़ी ही करेंगे। श्रीलंका और विश्व क्रिकेट के इतिहास के शीर्ष खिलाडिय़ों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा चुके 37 वर्षीय संगाक्कारा ने कहा कि मैंने इस वर्ष विश्वकप के बाद ही क्रिकेट को पूरी तरह से अलविदा कहने का मन बना लिया था, लेकिन श्रीलंका क्रिकेट ने मुझसे भारत के खिलाफ सीरीज तक रूक जाने को कहा था। मुझे निश्चित तौर पर क्रिकेट की बहुत कमी खलेगी। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2000 में बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज श्रीलंका टीम में जुड़े संगाक्कारा ने लगातार अपने खेल को बेहतर किया और बाद में वह विश्व के नंबर एक बल्लेबाज भी बने।