मुंबई - संसद के मानसून सत्र में महत्त्वपूर्ण आर्थिक सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के पारित होने की उम्मीद ने बीते सप्ताह शेयर बाजार को भारी गिरावट से बचाया और अगले सप्ताह इसकी चाल रिजर्व बैंक की द्विमासिक ऋण एवं मौद्रिक नीति समीक्षा से तय होने की उम्मीद है। सप्ताह के पहले सत्र में पार्टिसिपेट्री नोट्स (पी-नोट्स) के जरिए होने वाले निवेश को प्रतिबंधित करने की विशेष जांच दल (एसआईटी) की सिफारिश से हतोत्साहित निवेशकों की बिकवाली से करीब 551 अंक तक लुढक़े बीएसई के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स को सप्ताहांत पर जीएसटी के चालू सत्र में पारित होने की उम्मीद में हुई लिवाली से सहारा मिला और यह 409 अंक चढक़र 28 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार 28114.56 अंक पर टिकने में कामयाब रहा।
इसी तरह करीब 161 अंक टूटा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी सप्ताहांत पर करीब 111 अंक की छलांग लगाकर शुरुआती दो सत्रों की भारी गिरावट की भरपाई करने में सफल रहा और पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 12 अंक बढक़र 8500 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार 8532.85 अंक पर पहुंच गया। सप्ताह के पहले दो सत्र उच्चतम न्यायालय द्वारा काले धन की जांच के लिए गठित एसआईटी की जारी रिपोर्ट में पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को निवेश के लिए पी-नोट्स के इस्तेमाल के नियम को सख्त बनाते हुए इसके निवेशकों की सही पहचान करने और उसके हस्तांतरण को रोकने की सिफारिश तथा बैंकों के खराब तिमाही परिणाम से हतोत्साहित निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण शेयर बाजार चारों खाने चित रहा। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पी-नोट्स पर निवेशकों से नहीं हड़बड़ाने की भी अपील की, लेकिन यह बयान भी निवेशकों का विश्वास नहीं लौटा पाया।