हरिद्वार - योग के सूत्र किसी धर्म विशेष के लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर इनसान के वास्ते है और इससे किसी धर्म के अनुयायियों को दूर रखने की बात करना भ्रम फैलाना है। योग का निरंतर अभ्यास इनसान को बीमारियों से दूर रखता है। इससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। योग करने से इस्लाम के बुनियादी उसूल प्रभावित नहीं होते हैं। इस्लाम के दो अहम मंत्र हैं- एक अनुशासन, दूसरा खुद पर संयम रखने की ताकत। यही दोनों मंत्र योग के भी हैं। योग से इनसान न सिर्फ अनुशासित रहता है बल्कि उसे खुद पर संयम रखने की ताकत भी मिलती है। योगऋषि पतंजलि के योग सूत्रों के आधार पर योग क्रियाएं की जाती हैं और इन सूत्रों में योग करते समय ध्यान लगाने की बात कहीं गई है।
इन सूत्रों के अनुसार व्यक्ति अपने धर्म की मान्यताओं के अनुसार ध्यान लगा सकता है। योग के दौरान हिंदू भगवान का ध्यान लगाते हैं तो मुसलमान अल्लाह का ध्यान लगा सकते हैं। यह दावा मुस्लिम योग गुरु गुलाम अस्करी जैदी का है। जैदी करीब 12 वर्ष से योग सीखा रहे हैं। उन्होंने देव संस्कृत विश्विवद्यालय हरिद्वार से योग की शिक्षा हासिल की और योग को अपना करियर बनाना योग की शिक्षा दे रहे हैं। श्री जैदी का कहना है कि योग को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जबकि योग बेहतर स्वास्थ प्रदान करता है और इनसान के लिए हर दृष्टि से फायदेमंद है।
योग गुरु जैदी का कहना है कि योग को धर्म विशेष का बताकर समाज को बांटने का प्रयास है। उनका कहना है कि योग शरीर तथा दिमाग दोनों को नियंत्रित करने में इनसान की मदद करता है। इस दृष्टि से योग किसी धर्म अथवा मजहब विशेष तक सीमित नहीं है यह सार्वभौम और सर्वजनीन है इसलिए इसे उसी रूप में निर्विवादरूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। गायत्री परिवार के प्रमुख डा. प्रणव पंड्या कहते हैं कि योग धर्म नहीं, संस्कृति और जीवन जीने की कला है। यह किसी धर्म विशेष के लिए नहीं, बल्कि मानव मात्र के लिए है। संस्कृति का अर्थ है सदगुणों को जीवन में उतारने की प्रक्रिया और अध्यात्म का तात्पर्य है अच्छा और परिष्कृत जीवन जीने के लिए स्वयं को तैयार करना।