नई दिल्ली - भारत के इतिहास में 21 जून की तिथि स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने जा रही है, जब राजपथ के दोनों तरफ फैले विशाल लॉन में हजारों लोग खुले आसमान के नीचे दुनिया के सबसे बड़े योग शिविर में हिस्सा लेंगे। इस भव्य आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के और इसे निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए सरकारी मशीनरी दिन-रात काम कर रही है। बारिश की आशंका, सुरक्षा तामझाम और यातायात की दिक्कतों के बावजूद भारी संख्या में लोगों के सुबह छह बजे राजपथ पर पहुंचने की संभावना है।
अगले रविवार की सुबह पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर लगी होंगी, क्योंकि दुनिया को योग का तोहफा इसी देश की देन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में साक्षात्कार में कहा था कि हर भारतीय के लिए यह गर्व का विषय होना चाहिए कि भारत ने ही संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को 177 देशों ने अपना समर्थन दिया जो संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार हुआ। यह प्रस्ताव मात्र 100 दिन में पारित हो गया था।
श्री मोदी ने अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में गत 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की 69वीं बैठक को संबोधित किया था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से योग दिवस मनाने का आग्रह किया था। 11 दिसंबर को 193 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी, जबकि रिकार्ड 177 देशों ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी। इनमें से 47 देश इस प्रस्ताव के सह प्रस्तावक थे। कुल 176 देशों में लोगों के 21 जून को योग से जुडऩे की संभावना है। विदेशों में भारतीय मिशन इस कार्यक्रम में समन्वय कर रहे हैं।
दुनिया के छह महाद्वीपों में स्थित 250 शहरों में पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग शिविर आयोजित किए जाएंगे। भारत में इस अभियान की अगवाई खुद प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। राजपथ पर उनके साथ 35 हजार योगी योग करते नजर आएंगे। न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। श्रीमती स्वराज का कहना है कि देश के 650 जिलों और दुनिया के 193 देशों में से 192 में लोग योग शिविरों में हिस्सा लेंगे। इनमें केवल यमन ही अपवाद है जहां घरेलू युद्ध के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि यमन में हमारे दूतावास को जिबूती हस्तांतरित कर दिया गया है और यही वजह है कि एक देश इससे वंचित रह जाएगा। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों को कॉफी टेबल बुक की 7000 प्रतियां और योग पर आधारित 19000 संदर्भ पुस्तिकाएं भेजी गई हैं। सूत्रों ने संकेत दिया है कि करीब 30000 स्वयंसेवक राजपथ पर होने वाले मुख्य आयोजन में हिस्सा लेंगे, जिनमें कई योग गुरुओं के शिष्य भी शामिल होंगे। इस दौरान जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएंगे। किसी भी हवाई हमले से बचने के लिए भारतीय वायुसेना भी चौकस रहेगी। सूत्रों का कहना है कि इस आयोजन के लिए गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस की तरह सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।