ढ़ाका - बांग्लादेश ने रविवार को अपनी स्थापना के लिए 1971 में लड़े गए मुक्ति युद्ध में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका के प्रति आभार प्रदर्शित करते हुए उन्हें ‘बांग्लादेश मुक्ति युद्ध सम्मान’ प्रदान किया और उस लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान देने वाले प्रत्येक भारतीय सैनिक को सम्मानित करने की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां बंगभवन के दरबार हॉल में आयोजित एक भव्य समारोह में बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद के हाथों श्री वाजपेयी की ओर से यह सम्मान ग्रहण किया।
श्री मोदी ने इस मौके पर खुशी व्यक्त करते हुए दोनों मुल्कों का श्री वाजपेयी के नक्शे कदम पर चलते हुए ऐसे अटूट संबंध बनाने का आह्वान किया जो न तो किसी दबाव में नहीं आएं और न ही किसी कूटनीति का शिकार बन सकें। श्री वाजपेयी अस्वस्थ होने के कारण यह सम्मान लेने के लिए यहां नहीं आ सके। समारोह में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भी मौजूद थीं। श्री मोदी ने अपने संबोधन में श्री वाजपेयी के छह दिसंबर, 1971 में लोकसभा में दिए गए भाषण का उद्धृत किया।
उन्होंने कहा कि आज दोबारा वह वक्त आया है जब हम श्री वाजपेयी के मुक्ति युद्ध के दौरान लोकसभा में दिए उस वक्तव्य को याद करें, जिसमें उन्होंने कहा था के आज बांग्लादेश की आजादी के लिए वहां के लोगों के साथ भारतीय जवान भी रक्त बहा रहे हैं। यह रक्त ऐसे संबंधों का निर्माण करेगा जो कभी भी किसी भी दबाव में नहीं टूटेंगे। कभी किसी कूटनीति के शिकार नहीं बनेंगे।