मुंबई - सलमान खान को रेगुलर बेल दिलाने के लिए अब वकीलों ने माथापच्ची शुरू कर दी है, लेकिन सलमान को बेल का रास्ता जितना सरल दिखता है, उससे कहीं अधिक पेचीदा भी है। शुक्रवार को बांबे हाई कोर्ट सलमान की बेल एप्लीकेशन पर सुनवाई करने वाली है। संभव है कि बांबे हाई कोर्ट आठ मई को सलमान के जमानत की अर्जी स्वीकार कर ले और उन्हें रेगुलर बेल दे दे। हालांकि, अगर मुंबई सेशन कोर्ट से शुक्रवार को ऑर्डर की कॉपी मिल जाती है तो हाई कोर्ट अर्जी खारिज कर सकती है। अगर वहां बेल नहीं मिली तो सलमान के वकीलों की फौज दिल्ली में भी तैयार बैठी है।
ये वकील बेल एप्लीकेशन तैयार करके बैठे हैं। हाई कोर्ट में अर्जी खारिज होते ही वे सुप्रीम कोर्ट में एप्लीकेशन दे देंगे। बुधवार को मुंबई में भी सलमान के वकीलों ने ऐसा ही किया था। हरीश साल्वे की अगवाई में वकीलों की फौज ने सेशंस कोर्ट का फैसला आते ही हाई कोर्ट में बेल एप्लीकेशन लगा दी थी। बुधवार को जैसे ही सलमान को सेशंस कोर्ट से पांच साल बामशक्कत कैद की सजा सुनाई गई उसके बाद कुछ ही मिनटों में उनके वकील जमानत लेने के लिए हाई कोर्ट पहुंच गए। फैसले की कापी नहीं पेश किए जाने के कारण हाई कोर्ट ने दो दिन की अंतरिम बेल और शुक्रवार को सुनवाई की तारीख दे दी। जाने-माने वकील उज्ज्वल निकम के मुताबिक सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ पहली अपील आमतौर पर हाई कोर्ट में दायर की जाती है।
सलमान के वकील फैसले में खामियां बताकर हाई कोर्ट को इस पर सहमत कर सकते हैं कि आखिर उनकी अपील क्यों स्वीकार कर ली जानी चाहिए। निकम के मुताबिक केवल तभी हाई कोर्ट उनकी जमानत याचिका पर प्राथमिकता के आधार पर विचार कर सकता है, जिसका अभियोजन पक्ष जाहिर तौर पर कड़ा विरोध करेगा। निकम ने इसी तरह के एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरिम जमानत मिलना कोई असमान्य बात नहीं है। पूर्व मंत्री गुलाबराव देवकर मामले में जलगांव कोर्ट ने भी उन्हें अंतरिम जमानत दी थी, लेकिन जजमेंट कापी न मिलने के बाद बाद हाई कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था।
इसके बाद उन्होंने तुरंत सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जहां से उन्हें राहत मिल गई थी। हाई कोर्ट में सरकारी वकील संदीप शिंदे बुधवार को भी सलमान की बेल याचिका के विरोध की पूरी तैयारी में थे, लेकिन उन्होंने माना की जजमेंट कापी न मिलने का तर्क देकर सलमान के वकील अंतरिम जमानत लेने में सफल रहे। शिंदे अब हाई कोर्ट में शुक्रवार को जजमेंट कॉपी मिलने के बाद इस मामले की सुनवाई के दौरान जमानत के खिलाफ अपना तर्क रख रखेंगे।