मुंबई। बॉलीवुड के वयोवृद्ध अभिनेता दिलीप कुमार ने कहा कि उनकी हसरत पेशावर शहर के एक स्कूल में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए मासूम बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उनका दर्द बांटने की है। दिलीप स्वयं भी पेशावर के रहने वाले हैं। दिलीप की पत्नी सायरा बानो ने कहा कि दिलीप कुमार पेशावर स्कूल में हुए कत्लेआम से सकते में हैं। दिलीप (92) ने कहा कि मेरा जन्म अविभाजित भारत के खूबसूरत शहर पेशावर में हुआ है। मेरे जहन में अब भी उस जगह से जुड़ी कई खास यादें बसी हुई हैं। पाकिस्तान के तालिबान आतंकियों ने पेशावर में स्कूली बच्चों के साथ जो किया, वह पाप और अक्षम्य है।
पेशावर में अब भी दिलीप कुमार का पैतृक घर है। उन्होंने कहा कि इस कत्लेआम ने मुझे बयां न होने वाले जख्म दिए हैं। मेरा दिल इस क्रूरतम अपराध में अपने बेटे-बेटियों को खोने वाले माता-पिताओं से मिलने को व्याकुल है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के पेशावर शहर में तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने एक सैन्य स्कूल में घुसकर 132 विद्यार्थियों को मौत के घाट उतार दिया। दिलीप कुमार उर्फ यूसुफ खान का परिवार 1930 के दशक में कारोबार की वजह से महाराष्ट्र आकर बस गया था। हिंदी सिनेमा जगत से ही उन्हें दिलीप कुमार नाम मिला। दिलीप कुमार ने कहा कि मैं ऊपर वाले से दुआ करता हूं कि उन शोक संतप्त अभिभावकों को उनके इस दुख और खौफ के साथ जी पाने की हिम्मत दे। उन्होंने कहा कि ऐसी बुरी ताकतों को कुचलने और उखाड़ फेंकने का वक्त आ गया है।