नई दिल्ली - एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिक्स देशों में इंटरनेट पर खरीददारों की बढ़ती संख्या के मामले में भारत तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यही नहीं, हाल के दिनों में इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन खरीदारी करने वालों की संख्या में 70 लाख की बढ़ोतरी के साथ भारत में 15 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। ये आंकड़े देश में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन खरीदारी बाजार के हैं जिसने रिटेल मार्केट के कारोबार को बदल दिया है।
अमूमन लोगों में ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज बढऩे का कारण आसानी से आकर्षक ऑफर्स और वाजिब दाम में घर बैठे चीजें मिलना है। दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ रही इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या है। इसके मद्देनजर ई-कॉमर्स दूसरे बाजारों तक, बड़े स्तर पर कम लागत में कारोबार का विस्तार कर रहा है। इंटरनेट क्रांति ने जहां एक तरफ इस इज़ा$फे में बड़ी भूमिका तो निभाई ही है, वहीँ इसके भविष्य को और भी बेहतर बना दिया है। 1991 से देश में अपनाई गई उदारीकरण की नीति ने देश की अर्थव्यवस्था को काफी बल दिया। इसके कारण 20 सालों के अंदर इसमें प्रगतिशील विकास देखने को मिला, वहीं इसके विपरीत पिछले 5 सालों में ऑनलाइन खरीददारी कल्चर ने बाज़ार अर्थशास्त्रियों को भी चौंका दिया है। भारत में ऑनलाइन खरीदरी करने वालों की लगातार बढ़ रही संख्या में सबसे ज्यादा हिस्सा युवा वर्ग का है। युवाओं ने मोबाइल फोन, आईपैड, डिजीटल कैमरा, ज्वेलरी और फैशनेबल चीज़ों की ऑनलाइन खरीदारी में काफी रुचि दिखाई है।
इस नए ट्रेंड ने युवाओं के साथ सबसे ज्यादा महिलाओं के एक बड़े वर्ग को जोड़ दिया है। देश में ऑनलाइन खुदरा बाजार से जुड़े 75 प्रतिशत लोग 15 से 34 आयु वर्ग के हैं, जिनमें से 40 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। इन आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक स्तर पर युवा नेटिजंस की सर्वाधिक संख्या वाले देशों में भारत एक है। अनुमान है कि इस तरह की बढ़ोतरी से इनकी संख्या में आने वाले वर्षों में और अधिक इजाफा होगा।