नई दिल्ली - भारतीय दूर-संचार विनियामक प्राधिकरण ने आज यहां देश में फुल मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलीटी (पेन - इंडिया नम्बर पोर्टेबिलीटी) पर सिफारिशें जारी कीं।
''एक राष्ट्र- फुल मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलीटी'' के सम्बंध में राष्ट्रीय दूर-संचार नीति-2012 के प्रावधानों के अनुसार उक्त प्राधिकरण को दूर-संचार विभाग से दिनांक 27 दिसंबर, 2012 का पत्र प्राप्त हुआ। इसमें भारतीय दूर-संचार विनियामक प्राप्त अधिनियम के तहत फुल मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलीटी लागू करने के लिए उक्त प्राधिकरण से सिफारिशों के लिए अनुरोध किया गया था।
भारतीय दूर संचार विनियामक ने हितधारकों से फुल मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलीटी लागू करने से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों पर उनकी टिप्पणी जानकारी मांगी थी। हितधारकों से प्राप्त टिप्पणियों के आधार पर यह महसूस किया गया कि उनके विचारों में काफी अंतर था। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हितधारकों के साथ बैठकें की गई्ं और यह निर्णय लिया गया कि मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलीटी सेवा देने वालों तथा दूर-संचार सेवा देने वालों के प्रतिनिधियों का एक फोकस ग्रुप गठित किया जाए। इसने इस मुद्दे पर विचार कर प्राधिकरण को रिपोर्ट दी।
विभिन्न मुद्दों पर जांच करने के बाद, प्राधिकरण ने फुल मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलीटी पर आज उक्त सिफारिशें जारी कीं। इन सिफारिशों की मुख्य विशेषाताएं निम्नानुसार हैं:-
क) फुल मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलीटी (अंतर-सेवा क्षेत्र पोर्टेबिलीटी) लागू होने के बाद प्राप्तकर्ता परिचालक जोन के एमएनपीएसपी को (दूर-संचार सेवा प्रदाता जिससे नम्बर मूल रूप से पहली पोर्टेबिलीटी से पूर्व संबंधित था) पोर्टिंग अनुरोध प्रेषित करेगा।
ख) फुल मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलीटी को लागू करने के लिए दूर-संचार सेवा प्रदाता को 6 माह का समय दिया जाएगा।
ग) अंतर-सेवा क्षेत्र पोर्टेबिलीटी को सहज बनाने के लिए एमएनपी सेवा लाइसेंस के लिए कुछ परिवर्तनों का सुझाव दिया गया है।
घ) टीएसपी और एमएनपीएसपी के लिए चालू निर्धारित फीस का 25 प्रतिशत घटाया जाना। इन सिफारिशों को टीआरएआई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर भी दर्शाया गया है।