दालों की उपलब्धता बढ़ाने के क्रम में खासतौर पर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य सरकारों के माध्यम से वितरण के लिए आयात को फिर से प्रारंभ कर दिया है। केन्द्र राज्य सरकारों को इन आयातों के लिए सब्सिडी भी प्रदान करेगा। योजना का उद्देश्य बीपीएल कार्डधारकों को प्रति माह कम से कम एक किलो दालें उपलब्ध कराना है। दालों की उपलब्धता के बढ़ने से इसके मूल्यों को नियंत्रित करने पर भी प्रभाव पड़ेगा। आयातित सब्सिडीयुक्त दालों को न्यून आय समूहों से जुड़े लोगों के अलावा गरीब परिवारों, युवाओं के छात्रावासों को भी प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा दालों के मूल्य को नियंत्रित करने के लिए हाल ही उठाए गए विभिन्न कदमों में शामिल हैं -
• दालों के लिए आयात शुल्क घटाकर शून्य तक किया गया।
• दालों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया (काबुली चने, जैविक दालें और मसूर की दाल प्रति वर्ष अधिकतम 10 हजार टन के अलावा)।
• दालों के मामले में समय-समय पर भंडार सीमाओं को लागू किया।
• उड़द और तूर में भविष्य में होने वाले व्यापार को स्थगित किया।
दालों की घरेलू आपूर्ति को बढ़ाने के लिए भी कई उपाय किए जा चुके हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान (एनएफएसएम)- दालें 468 जिलों में कार्यान्वित किया जा रहा है। दालों के उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए ग्राम स्तरीय ब्लाकों में उत्पादन और सुरक्षा तकनीकों के प्रदर्शन के लिए खरीफ 2012 से एनएफएसएम-दालों के अंतर्गत त्वरित वृद्धि दाल उत्पादन कार्यक्रम (ए3पी) का शुभारंभ किया जा चुका है। इसके अलावा कृषि की व्यापक प्रबंधन योजना के अंतर्गत राज्यों में दालों के उत्पादन के लिए सहायता भी प्रदान की जा रही है। हालांकि यह कार्यक्रम एनएफएसएम-दालों के अंतर्गत नहीं हैं।