मुंबई - भारत की प्रमुख क्रेडिट हैल्थ इम्प्रूवमेंट कंपनी क्रेडिट सुधार ने भारत में अपने सबसे पहले क्रेडिट हैल्थ सर्वे के नतीजे जारी किए हैं। यह सर्वे देश के 8 शहरों में हुआ और इसमें 300 से ज्यादा लोगों से सूचनाएं एकत्र की गईं।
भारत में क्रेडिट के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए अभी बहुत काम करना होगा क्योंकि 85 प्रतिशत से अधिक लोगों को मालूम ही नहीं है कि क्रेडिट ब्यूरो क्या होते हैं। दिल्ली व पुणे इस जानकारी में सबसे आगे हैं, इन शहरों के हर 4 में से एक व्यक्ति क्रेडिट ब्यूरो के बारे में जानता है। खास बात यह भी है कि 92 प्रतिशत लोगों को अपने क्रेडिट स्कोर के बारे में कुछ पता नहीं है। दिल्ली, बैंगलुरु व पुणे में 10 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपना स्कोर मालूम था।
क्रेडिट सुधार के सह-संस्थापकों अरुण रामामूर्ति और गौरव वाधवानी ने बताया, ’’ये सर्वे करने का मुख्य उद्देश्य उन लोगों के क्रेडिट संबंधी कारण व प्रभाव का विश्लेषण करना था जिन्हें खराब क्रेडिट हैल्थ झेलनी पड़ी। दूसरे शब्दों में हम यह समझना चाहते थे कि जिन लोगों को नकारात्मक क्रेडिट इतिहास और कम क्रेडिट स्कोर के चलते कर्ज उपलब्ध नहीं हो रहा था, उसके कारण क्या थे। इस सर्वे में यह खुलासा हुआ कि 91 प्रतिशत ग्राहक अपनी देनदारी का भुगतान न होने के परिणाम से अनजान थे। हमारा मानना है कि इनमें से बहुत से मामलों की रोकथाम की जा सकती थी अगर वे अपनी क्रेडिट हैल्थ तथा देनदारी के भुगतान न होने के असर के बारे में जागरुक होते। इस सर्वे के दौरान हम यह भी जान पाए कि भारत में पेशेवराना क्रेडिट परामर्श लगभग न के बराबर है, जिससे क्रेडिट परामर्श सेवाओं के लिए काफी संभावना बनती है।’’
केवल 4 प्रतिशत लोगों ने पिछले एक साल में अपने क्रेडिट स्कोर की समीक्षा की, सर्वे में भाग लेने वाले 98 प्रतिशत प्रतिभागी उस रिपोर्ट को समझने में नाकाम रहे जो उन्हें दी गई। सर्वे में पता लगा कि क्रेडिट की सुरक्षा एक बड़ी चिंता है क्योंकि किसी भी प्रतिभागी ने अपनी पहचान को चोरी से बचने के लिए कोई कदम नहीं उठाया था।
वसीयत एक महत्वपूर्ण साधन है, जो विरासत को सुरक्षित करने और परिसम्पतियों के विवादमुक्त स्थानांतरण को सुनिश्चित करने में बहुत काम आता है। केवल 1 प्रतिशत लोगों ने वसीयत तैयार की है और बाकियों को वसीयत बनाने के बारे में कोई विचार नहीं आया या फिर वे वसीयत की अवधारणा समझ ही नहीं पाए। कर अनुकूलन के मामले में केवल 17 प्रतिशत लोगों ने ही विशेषज्ञ की मदद ली थी।
सर्वे के दौरान क्रेडिट सुधार ने 2116 क्रेडिट ब्यूरो रिपोर्टस् का विश्लेषण किया तथा उसके मुताबिक व्यक्तियों के साथ ब्यूरो रिपोर्ट में मौजूद ब्यौरों की विवेचना की। इस विश्लेषण के आधार पर 557 लोगों की रिपोर्टस् में गलतियां पाई गईं।
सर्वे का दूसरा हिस्सा इस पर लक्षित था कि भारतीय बाजार में बड़े क्रेडिट ब्यूरो की पैठ को समझा जाए, खासकर बड़े वित्तीय संस्थानों की पहुंच को। यह स्पष्ट था कि ब्प्ठप्स् ऐसा ब्यूरो है जहां अधिकांश संस्थान अपना डाटा अपलोड करते हैं, इक्विफैक्स का नंबर दूसरा था। माइक्रोफाईनेंस कर्ज देने के मामले में बाजार पर हाईमार्क और इक्विफैक्स का प्रभुत्व कायम है।
अरुण रामामूर्ति एवं गौरव वाधवानी का यह भी कहना था, ’’खुदरा स्तर पर लोगों की क्रेडिट प्रोफाइल के प्रति समझ और भारतीय बाजार में इसकी व्यापकता एवं संदर्भ की समग्र समझ प्राप्त करने के लिए हमने कुछ तय मानकों का विश्लेषण करने के लिए यह सर्वे किया। इस सर्वे में हमने जिन चार बड़े पहलुओं पर अध्ययन किया वे थेः भारत में व्यक्तिगत क्रेडिट प्रोफाइलिंग के पैटर्न व व्यवहार पर उपभोक्ता सर्वेक्षण, क्रेडिट में कमजोरी, क्रेडिट ब्यूरो रिपोर्टस् में गलतियों का असर तथा भारत में क्रेडिट ब्यूरो एवं वित्तीय संस्थानों में उनकी पैठ। परिणाम बताते हैं कि जागरुकता व क्रेडिट की व्यापक समझ के मामले में लोग जहां हैं और जहां उन्हें होने चाहिए उसमें बहुत फर्क है।’’
सर्वे के अहम खुलासेः
92 प्रतिशत लोग अपने क्रेडिट स्कोर से अनजान हैं।
86 प्रतिशत लोगों ले किसी क्रेडिट ब्यूरो के बारे में नहीं सुना है।
पिछले 1 साल में मात्र 4 प्रतिशत लोगों ने अपना क्रेडिट स्कोर चैक किया है।
जब सर्वे में शामिल लोगों को क्रेडिट रिपोर्ट का एक नमूना दिखाया गया तो 98 प्रतिशत लोग उसे समझ नहीं पाए।
क्रेडिट में चूक करने वाले 91 प्रतिशत लोग अपने कदमों के नकारात्मक नतीजों से अनजान हैं।
केवल 1 प्रतिशत लोगों ने वसीयत तैयार की है।
किसी भी व्यक्ति के पास अपनी पहचान सुरक्षित रखने के इंतजाम नहीं थे।
कुल मिलाकर क्रेडिट जागरुकता और क्रेडिट सुरक्षा बेहद कम है।
पुराना होने के कारण ब्प्ठप्स् का ज्यादा प्रभुत्व है, लेकिन इक्विफैक्स अब तेजी से आगे बढ़ रहा है।
क्रेडिट सुधार की स्थापना क्रेडिट-चक्र के विभिन्न स्तरों पर लोगों की क्रेडिट हैल्थ को बहाल करने, बढ़ाने और सुरक्षित करने के विचार के साथ की गई थी।