रेल किराए के बाद सोने का शौक रखने वाले लोगों के लिए बुरी खबर है क्योंकि सरकार ने सोने का आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार ने आयात शुल्क मौजूदा चार फीसदी से बढ़ाकर छह फीसदी कर दिया है।
सरकार ने सोने तथा प्लेटिनम के आयात पर शुल्क दर 4 से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दी है। सरकार को यह फैसला लेने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा क्योकि सोना सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। एक तरफ सोने का बढ़ता आयात खजाने के संतुलन को बिगाड़ रहा है दूसरी तरफ सोने का भाव रुपये के बदले डॉलर को मजबूत कर रहा है।
इसके अलावा सरकार ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड को सोने की जमा योजना से जोड़ने का फैसला किया है। स्वर्ण जमा योजना में यह बदलाव ऐसे लोगों के लिए लाभदायक होगा जो अपने बेकार पड़े सोने को बैंकों में जमा करना चाहते हैं। सरकार ने आम लोगों से भी यह अपील की है कि वो जरूरत से ज्य़ादा सोने की खरीद न करें ताकि सोने के आयात पर लगाम लगाई जा सके।
जाहिर है सोने का आयात देश के चालू खाते के घाटे पर असर डाल रहा है। चालू वित्त वर्ष 2012-13 की पहली छमाही में 20.25 अरब डॉलर का सोना आयात किया गया। सोने के आयात की तेजी का अंदाजा सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि पहली छमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में मात्र 10.5 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। यानी सोने के आयात की रफ्तार विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से दोगुनी रही है।
बहरहाल यह तो तय है कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी से सोने के आयात पर लगाम लगेगा और चालू खाते के घाटे को कम करने में मदद मिलेगी लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इससे सोने की तस्करी और बढ़ेगी।