मुंबई: वर्ष 1993 में हुए मुंबई बम विस्फोट मामले में अभिनेता संजय दत्त कल टाडा की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे जबकि एक जेल अधिकारी ने बताया कि जान की धमकी वाले पत्र के चलते अभिनेता को कारागार में पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी.
अदालत ने संजय दत्त को आज वह आवेदन वापस लेने की अनुमति दे दी जिसमें उन्होंने पुणे की यरवदा जेल में आत्मसमर्पण की अनुमति मांगी थी. संजय के वकील सुभाष जाधव ने आज सुबह विशेष अदालत में कहा कि अभिनेता कल दाखिल की गई याचिका वापस लेना चाहते हैं और वह अगले दिन 16 मई को पुणे की येरवदा कारागार की बजाय यहां टाडा अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे. अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी.
बहरहाल, जाधव ने यह नहीं बताया कि अभिनेता ने आवेदन वापस क्यों लिया. अदालत ने भी उनसे यह नहीं पूछा कि अपनी याचिका पर अभिनेता जोर क्यों नहीं दे रहा. आवदेन वापस लेने की अदालत की इजाजत के बाद संजय के वकील ने बताया कि अभिनेता कल आत्मसमर्पण करेंगे.
दत्त ने पहले उसी अदालत में मौखिक आग्रह किया था कि वह येरवदा कारागार के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहते हैं. विशेष टाडा न्यायाधीश ने उनका अनुरोध ठुकरा दिया था. उसके बाद लिखित आवेदन किया गया जिसे आज उन्होंने अचानक वापस ले लिया.
53 वर्षीय संजय दत्त को शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया है और पांच साल की सजा सुनाई गई है. संजय ने उच्चतम न्यायालय से अपनी दोषसिद्धी और पांच साल की सजा दिए जाने के उसके फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया था जिसे 10 मई को खारिज कर दिया गया.
इस बीच, पुलिस महानिरीक्षक (कारा) विनोद लोखंडे ने कहा कि मुंबई के आर्थर रोड केंद्रीय कारागार अधिकारियों को एक अनाम पत्र मिला है जिसमें संजय की जिंदगी को खतरे की बात कही गई है. उन्होंने उसका ब्योरा प्रकट नहीं किया. आर्थर रोड केंद्रीय कारागार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने तीन दिन पहले प्राप्त पत्र का संज्ञान लिया है और संजय दत्त को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाएगी.’’ पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि दत्त को किस कारागार में रखा जाएगा, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि संभवत: उन्हें शुरु में आर्थर रोड कारागार ले जाया जाए और बाद में उन्हें येरवदा जेल स्थानांतरित किया जाए.
सूत्रों ने बताया कि सामान्यता यह तरीका है कि विचाराधीन बंदियों को आर्थर रोड कारागार में रखा जाता है जबकि दोषी को येरवदा जेल और महाराष्ट्र की दूसरी जेलों में रखा जाता है. इससे पहले, जेल की सजा काटने की खातिर आत्मसमर्पण करने के लिए संजय को चार सप्ताह का समय दिया गया था. उच्चतम न्यायालय ने 1993 के बम विस्फोट मामले में संजय की दोषसिद्धी 21 मार्च को बरकरार रखी थी. न्यायालय के मुताबिक इन विस्फोटों को अपराध जगत के सरगना दाउद इब्राहीम और अन्य ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की संलिप्तता से अंजाम दिया था.
टाडा अदालत ने वर्ष 2006 में संजय को छह साल की सजा सुनाई थी. उच्चतम न्यायालय ने यह अवधि छह साल से घटा कर पांच साल कर दी. संजय को परिवीक्षा पर रिहा करने से इंकार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि उनके अपराध की प्रकृति गंभीर है.
संजय को टाडा अदालत ने नौ एमएम की पिस्तौल और एक एके 56 रायफल गैरकानूनी तरीके से रखने का दोषी ठहराया था. यह पिस्तौल और रायफल हथियारों और विस्फोटकों की उस खेप का हिस्सा थे जिन्हें बम विस्फोटों के लिए भारत लाया गया था. वर्ष 1993 में हुए इन विस्फोटों में 257 व्यक्ति मारे गए और 700 से अधिक घायल हो गए थे.